Category: Hindi poetry

आभास का १८ वाँ और दैवित का पहला जन्मदिन

मेरे घर के आँगन में दो पोधे बड़े हो रहे हे। देखों आज दोनो पे एक एक फूल आया हे। एक का नाम आभास हे जिसका कद थोड़ा बड़ा हे,  लगता हे की अपने आप से ही बढ़ा हे।  पिछले १८ बरसों से पता ही नहीं चला कि घर के आँगन में कहा खड़ा हे। …

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आज मे फिर अपने देश हो आया हुँ!

आज में फिर अपने देश हो आया हुँ।।कोरोना काल में भी अपनी मिट्टी से ख़ुशबू ले आया हुँ।।ना जाने इस मिट्टी में कितने दिन खेले थे।हर दिन का आज में हिसाब कर आया हुँआज में फिर अपने देश हो आया हुँ।। उस ने कहा मत जाओ।। कुछ ने कहा रुक जाओ।अभी कोरोना का ख़तरा टला…

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