आभास “हर वो एहसास जो अब भी ज़िंदा है”

में कोई कवि नहीं और शायर तो बिलकुल भी नहीं हूँ। जबसे सोचना शुरू किया तबसे मन में सवाल बहुत उबलते थे लेकिन उनके जवाब नहीं मिल पाते थे।
बस जीवन में जब से जवाब मिलने शुरू हुए तब से उनको लिखना शुरू कर दिया। समय, स्थान और सीमा का ध्यान नहीं रखा।
वही पेश कर रहा हूँ इस किताब में।

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देश की प्याऊँ और बचपन की याद।

अपने देश की मिट्टी, पानी और हवा में मिलावट हो ही नहीं सकती। प्याऊँ इन तीनों तत्वों का अभिन्न संगम होता है। बचपन की एक याद ताजा हो गई।

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वो जो एक घर हुआ करता था ।

वो जो एक घर हुआ करता था । कहने को विदेश में था लेकिन विशेष था  जब ख़रीदा था बड़ा महँगा लगता था जब उसमें रहने लगे तो बस अपना लगता था। घुसते ही ऐसे बाहों में भरता था जैसे माँ ने गले से लगा लिया हो।  उसके चारों कोनों में, अलग अलग कुछ यादे…

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Baithak (Living Concert) by Kunal Jain

Personal Thoughts, Pictures and Poetry

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