Tag: Hindi poetry

आज मे फिर अपने देश हो आया हुँ!

आज में फिर अपने देश हो आया हुँ।।कोरोना काल में भी अपनी मिट्टी से ख़ुशबू ले आया हुँ।।ना जाने इस मिट्टी में कितने दिन खेले थे।हर दिन का आज में हिसाब कर आया हुँआज में फिर अपने देश हो आया हुँ।। उस ने कहा मत जाओ।। कुछ ने कहा रुक जाओ।अभी कोरोना का ख़तरा टला…

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सन्नाटा छाया है , घौर सन्नाटा छाया है। कोरोना आया है ।।

कोरोना के आतंक से चारों और मौत का साया है।
सुनी गलियाँ, बंद दुकाने और घर के दरवाज़े,
सन्नाटा छाया है , घौर सन्नाटा छाया है।
By Kunal Jain

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Freedom

उड़ने दो परिंदों को की उन्हें पूरा जहाँ नापना है । आकाश थोड़ा छोटा है, मगर उम्मीदों को पंख लगे है , उन्हें उड़ना है । इस जहाँ से परे एक और जहाँ है उसे थोड़ा सा झुकना है ।।। उड़ने दो इस परिंदे को की इसे पूरा आकाश नापना है इस जहाँ से परे…

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