Category: Hindi poetry

एक नन्ही निर्भया मेरे आँगन में……. A little…..

एक नन्ही निर्भया हवा के परों पे चलकर हमारे आँगन में उतर आती है कहा से तू आयी, क्यूँ तू आयी, यह नहीं बतलाती है। मेरे घर की दहलीज़ के अंदर बाहर, गिलहरी सी फुदकती रहती है । अपनी चुलबुली मुस्कराहट से सबको गुदगुदाती रहती है । Noodles और maggi के भरोसे ज़िंदा रहती है।…

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A poem on a peon! छोटू के नाम!

Original in Hindi बीस बरस पुरानी इस तस्वीर से कई किरदार ज़हन में यकायक उबर कर सामने आ खड़े हुए। एक नाम था छोटू या अंग्रेज़ी में कहे तो canteen boy। छोटू वो शख़्स था जिसकी भोली शक्ल, पसरी हुई हंसी और कमाल की फुर्ती हमें उसका सबसे बड़ा फ़ैन बनाती थी। कोई कहता छोटू…

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मेरा वो मकान रोज़ कई सवाल करता है!

कुछ दिन हुए मुझे सपने में मेरा वो मकान दिखाई दिया,जिसमें कभी मेने वो बचपन गुज़ारा था। जिसका जिकरा मेने शायद आज तक किसे से नहीं किया। उस मकान की ऊपर वाली मंज़िल पर अब कोई नहीं रहता ।                       माँ से बात हुई तो…

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Freedom

उड़ने दो परिंदों को की उन्हें पूरा जहाँ नापना है । आकाश थोड़ा छोटा है, मगर उम्मीदों को पंख लगे है , उन्हें उड़ना है । इस जहाँ से परे एक और जहाँ है उसे थोड़ा सा झुकना है ।।। उड़ने दो इस परिंदे को की इसे पूरा आकाश नापना है इस जहाँ से परे…

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