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Kunal Jain View All →

Made in India, Serving Humanity, Living in Safety Harbor Florida, USA. Healthcare Entrepreneur. Author ”A Philanthropist Without Money” Driven by an inherent desire for knowledge and creative thinking, I harnessed my “Mid Life” energies to becoming a student again, challenging myself to take an executive course in ‘Global Healthcare Innovation’ from Harvard Business School and a Master’s degree in Entrepreneurship from the University of South Florida. Not satisfied with personal success alone, now I’m on a mission to help other aspiring entrepreneurs through mentoring, nurturing, raising funding, and connecting people with more possibilities.

मेरा वो मकान

Originally posted on Baithak (Living Concert):
कुछ दिन हुए मुझे सपने में मेरा वो मकान दिखाई दिया, जिसमें कभी मेने वो बचपन गुज़ारा था जिसका जिकरा मेने शायद आज तक किसे से नहीं किया । उस मकान की ऊपर वाली मंज़िल पर अब कोई नहीं रहता । माँ से बात हुई तो बोली अब मुझमें…

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An Ode To My Father – Kaushal Kishor Jain

Today is my father 5th Commemoration day. He left us as I stood by his bedside. Kaushal Ji’s friends and our extended family gave me tremendous strength by convincing me that it was his destiny, and not a failure. It was his time to go. But I still can’t shake off the feeling that as his son, I was not with him in his final moments of consciousness. Here is one chapter for you to read from the book I wrote on him last year.

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सन्नाटा छाया है , घौर सन्नाटा छाया है। कोरोना आया है ।।

कोरोना के आतंक से चारों और मौत का साया है।
सुनी गलियाँ, बंद दुकाने और घर के दरवाज़े,
सन्नाटा छाया है , घौर सन्नाटा छाया है।
By Kunal Jain

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All That Corona Has Changed in me? कोरोना ने कितना कुछ बदल दिया है?

पहले हम वॉक करते थे तो शायद यह भी नहीं देखते थे की साथ में कौन चल रहा है ? हाथ में फ़ोन और उँगलिया स्क्रीन पर नाचती रहती थी, मन किसी और के बारे में सोचता रहता था। अब सब कुछ बदला बदला नज़र आता है, साथ में कौन चल रहा है इस बात की फ़िकर होने लगी है!..........

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एक नन्ही निर्भया मेरे आँगन में……. A little…..

एक नन्ही निर्भया हवा के परों पे चलकर हमारे आँगन में उतर आती है कहा से तू आयी, क्यूँ तू आयी, यह नहीं बतलाती है। मेरे घर की दहलीज़ के अंदर बाहर, गिलहरी सी फुदकती रहती है । अपनी चुलबुली मुस्कराहट से सबको गुदगुदाती रहती है । Noodles और maggi के भरोसे ज़िंदा रहती है।…

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